हमें छोटे आकार वालोँ का मूल्यांकन कम नहीं आँकना चाहिये (WE SHOULD NOT UNDERESTIMATE THOSE HAVING SMALL SIZE)

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जो आकार में बड़ा है, वह तो शक्तिशाली होगा ही, परंतु जो आकार में छोटा है व़ह भी बड़े के अनुसार बलशाली हो सकता है। एक छोटी सी चींटी, एक हाथी के लिये जीना मुश्किल कर सकती है,  यदि व़ह हाथी की सूंड में प्रवेश करले। मच्‍छर एक छोटा सा जीव है, परंतु उसके काटने से किसी आदमी को बीमारी तो हो ही सकती है, बल्कि मौत भी हो सकती है। जंग लगी हुई कील यदि पैर में या कहीं और चुभ जाती है तो इसके कारण मृत्यु भी हो सकती है। कई बार ऐसा देखा गया है कि एक छोटा पक्षी हवाईजहाज से टकराता है और हवाईजहाज दुर्घटना की स्थिति में आ जाता है। एक बार एक छिपकली मेरे एक दोस्त की कार में घुस गई, परंतु उसे मालूम नहीं चला। एक दिन वह अपने दो साथियों के गाड़ी चला रहा था और थोड़ी दूर ही पहुंचा होगा कि छिपकली अचानक ही कार के डॅशबोर्ड पर आ गई और फिर शीघ्र ही मेरे मित्र के शरीर पर कूद पड़ी। वह आश्‍चर्यचकित हो गया और थोड़ी देर के लिये गाड़ी का नियंत्रण खो बैठा, परंतु थोड़ी देर में ही उसने गाड़ी को अपने नियंत्रण में ले लिया, गाड़ी को सड़क के एक तरफ मोड लिया और फिर जल्दी ही ब्रेक लगा कर कार को रोक लिया। फिर सभी कार के बाहर आ गये। उसके बाद वह छिपकली कूद कर गाड़ी के बाहर आ गई। फिर उन लोगों ने अपनी यात्रा दुबारा शुरू की, हालांकि वे सभी कुछ समय के लिये परेशान जरूर रहे। ऐसे और भी अनेक उदाहरण मिल सकते हैं। निष्कर्ष यही निकलता है कि अपने विरोधियों का, उनके छोटे आकार के कारण, हमारे द्वारा कम मूल्याँकन करना ठीक नहीं है। कई बार देखा गया है कि वे अपनी अच्छी रणनीति, अनजानी ताकत और शक्ति से हमे काफी नुकसान पहुंचा सकते हैं।

——-vijaiksharma

 

 

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About vijaiksharma

OVERALL BRIEF PROFILE: An engineer cum management professional from Jaipur, India. Has been active as freelance writer, reviewer, trainer, examiner and translator. Has interests in Management, Quality, Meditation and Yoga. Has jointly written 6 books, besides about 185 articles, book-reviews, case studies, interviews and translations etc. published in foreign in Indian publications & 24 radio talks broad cast on All India Radio. A book-reviewer, an abstract writer and one of the “Writers of the month” for Jan 2007 on www.shvoong.com. Has won President of India award in 1968, Fellowship award in 1992 and H K Firodia award in 1996, Colvin Medal in 1957, besides other appreciation letters. Has been abroad 6 times to USA, Europe, Bulgaria and Egypt. Also writes blogs with following links www.vijaiksharmaspeaks.blogspot.in, www.vijaiksharma.webs.com, www.sthavir.blogspot.in,

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